Thursday, October 6, 2022
Saturday, July 16, 2022
34 दिन में 8540 KM का बाइक से अकेले सफर, पूर्वोत्तर को जानने का मिला अवसर
नई दिल्ली: 6 सालों में 25 हजार किलोमीटर का सफर तय करके भारत के अनछुए पहलुओं को लोगों के सामने लेकर आने के बाद सातवीं ट्रिप में कुछ बड़ा ही धमाका हुआ. 100 सीसी की टीवीएस स्पोर्टस बाइक से सातवीं बार में 8540 किमी का सफर तय कर डाला, वह भी मात्र 34 दिन में. चूंकि इतने दिन की छुट्टी किसी भी संस्थान में मिलना मुश्किल थी, इसलिए मीडिया की नौकरी को भी कुछ समय के लिए बाय-बाय कहना पड़ा.
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| नगालैंंड की जमीन पर भोपाल से गई बाइक. |
बाइक से सातवीं यात्रा पूर्वोत्तर भारत की थी जो 7 अप्रैल 2022 को भोपाल से शुरू हुई थी और 10 मई को भोपाल में ही खत्म हुई थी. इस दौरान भारत के 14 राज्यों और देश की राजधानी दिल्ली से गुजरना हुआ.
इस यात्रा का निर्णय भी अचानक हुआ था. सिर्फ एक दिन पहले ही प्लान हुआ था कि नॉर्थ ईस्ट की यात्रा करनी है. इस यात्रा को करते ही भारत के सभी 28 राज्यों को कवर करने का सपना पूरा होने वाला था. 10 साल पुरानी 100 सीसी बाइक से पूर्वोत्तर के पहाड़ों में जाना वाकई में अपने आप में चुनौती थी लेकिन उस चुनौती को भी सफलतापूर्वक पूरा किया. इस सफर में कुल 40 हजार रुपये का खर्चा आया, उसमें भी कई लोगों ने आगे बढ़कर मदद की. इस खर्चे में बाइक का पेट्रोल, रहना, खाना, टूरिस्ट प्लेस की टिकट शामिल हैं.
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| मेघालय में झरनों के बीच. |
अब इसी यात्रा को शब्दों में पिरोने का काम शुरू हो रहा है. यह यात्रा 34 दिनों में हुई तो कोशिश है कि इसे 34 ब्लॉग में पूरा लिख दें. इस यात्रा में रोमांच तो है ही, साथ ही यात्रा के बाद जो हुआ, वह भी आम इंसान को समझने की जरूरत है.
Whatsapp : 9827319747
Friday, October 1, 2021
100 CC: राइडर से राइटर तक का सफर | Impact Originals | Full Documentary
Friday, October 23, 2020
GAZAB- ऐसा सोलो ट्रैवलर कहीं देखा ना होगा, 77 दिनों में 25 हजार किमी का ...
Sunday, April 26, 2020
हाइवे के इस होटल में एक ही शख्स निभाता है बावर्ची, वेटर, मैनेजर और मालिक का रोल
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| हुम्मा शहर, ओडिशा |
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| चिल्का लेक का ग्रामीण जनजीवन |
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| सादपाड़ा, यहां बोट से 45 मिनट का सफर कर दूसरे पार जाना होता है। |
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| जगन्नाथ पुरी से पहले खाने का होटल, ओडिशा |
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| होटल में वेटर, बावर्ची, मैनेजर और मालिक |
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| कम संसाधनों में भी सुखी जीवन जीने की ललक |
Whatsapp : 9827319747
Sunday, January 12, 2020
हेरिटेज वॉक: फिरोजशाह कोटला में दिखा जब 'रुहानी ताकतों' का असर, यहां गड़ा है 'अशोका पिलर'
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| दिल्ली के फिरोजशाह कोटला किले में सम्राट अशोक का प्रस्तर स्तंभ (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| फिरोजशाह कोटला किले का टिकटघर (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| फिरोजशाह कोटला में हेरिटेज वॉक (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| किले में जगह-जगह बने हैं 'जिनों' के आले (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| दीवान-ए-खास के ध्वस्त अवशेष (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| इस तरह बसाई गई थी सात बार दिल्ली (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| फिरोजशाह कोटला से लगी मजार (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| यहां से नीचे मजार तक सीढ़ियां जाती हैं जिन्हें अब बंद कर दिया गया है (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
इसके बाद एक और जगह आई जिसे 'घेर वाले जिन' कहते हैं। यहां भी दीपक और सुंगधित अगरबत्ती जलती हुई दिखाई दीं और कुछ आंवले भी वहां रखे थे। इन आंवलों को वहां एक कुत्ता को खाते देखा। कहते हैं यहां जिन किसी भी रूप में आ सकता है, इसलिए कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह 'जिन' का ही कोई रूप होगा।
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| घेर वाले जिन (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| इस मस्जिद के ऊपर से नीचे गिरी थी लड़की (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| इमारत से गिरी लड़की को किसी तरह एंबुलेंस बुलाकर हॉस्पिटल पहुंचाया (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| यहीं से नीचे गिरी थी लड़की। उनकी अम्मीजान यहां मन्नत मांगने आई थी (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| जामी मस्जिद (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| इसी सुरंग में हुआ था मुगल बादशाह आलमगीर द्वितीय का कत्ल (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| लाट वाले बाबा, फिरोजशाह कोटला किला, दिल्ली (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| पिलर पर ब्राह्मी लिपि में लिखी गईं सम्राट अशोक की राजआज्ञाएं (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
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| पिलर पर खुदा हुआ सम्राट अशोक का राजचिह्न हाथी (Photo: Shyam Sundar Goyal) |
लेख- श्याम सुंदर गोयल (Shyam Sundar Goyal)
Sunday, September 22, 2019
सैकड़ों लाशों से भर गई थी खूनी झील, आज भी नजर आता है सिर कटा सवार !
दिल्ली...कई सल्तनतों और बादशाहत की गवाह रही है दिल्ली। इसी दिल्ली के इतिहास को समझने के लिए 15 सितंबर रविवार को शामिल हुए 'सैर-ए-दिल्ली' https://www.facebook.com/SaireDilli/ के Northern Ridge ट्रेक में। इसमें आज सवा दो हजार सालों के इतिहास का साक्षी बनना था। इस ट्रेक में शामिल थे फ्लैगस्टॉफ टॉवर, गार्ड हाउस, खूनी झील, चौबुर्जी मस्जिद, पीर गायब, अशोक स्तंभ और म्यूटिनी मेमोरियल। ये ट्रेक सुबह 9 बजे शुरू हुआ और 12 बजे खत्म हुआ जिसमें 5 किलोमीटर की पैदल हेरिटेज वॉक हुई।
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| Sair E Dilli केे साथ हेरिटेज वॉक |
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| फ्लैगस्टॉफ टॉवर |
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| गार्ड हाउस |
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| खूनी झील |
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| अशोका पिलर |
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| दिल्ली-मेरठ अशोका पिलर |
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| म्यूटिनी मेमोरियल |
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| म्यूटिनी मेमोरियल |
Whatsapp : 9827319747





























































