6 सालों में भारत (Solo India Trip on Bike) के 20 राज्यों में 23,500 किलोमीटर की बाइक से यात्रा के दौरान कुछ ऐसे पल भी आए जब सीधे मौत ने दस्तक दे दी। कुछ ही सेकंड ही आप मरने वाले हों और फिर उस स्थिति से बाहर आना। ऐसी ही एक घटना 28 मार्च 2017 को महाराष्ट्र के मालवण तट पर स्कूबा डाइविंग के दौरान घटी जिसके पास समुद्री सिंधुदुर्ग किला है।
ये सफर नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए
आग का दरिया है और तैर कर पार करना है...
कुछ इसी तरह के अनुभव भारत यात्रा (Journey of India) में हुए हैं। आज मैं आपको बताने जा रहा हूं 28 मार्च 2017 की उस घटना के बारे में जब मैं साउथ इंडिया (Journey of South India) की 7214 किमी की यात्रा पर था।गोवा (Journey of Goa) से लौटते हुए समुद्री किले सिंधुदुर्ग को देखने की इच्छा हुई। सिंधुदुर्ग किला (Sindhudurg Fort) महाराष्ट्र के मालवण तट पर है। मालवण से वहां जाने लिए स्टीमर चलते हैं।
मैं मालवण गया तो था किला देखने लेकिन वहां जब देखा कि 800 रुपए में स्कूबा डाइविंग हो रही है तो मैंने पहले स्कूबा डाइविंग (5 best places to go scuba diving in India) की सोची, उसके बाद किला घूमने की। अपनी बाइक (Bike Trip) वहीं किनारे खड़े की और काउंटर पर जाकर 800 रुपए की रसीद कटाई। उस स्टीमर पर और भी लोग सवार थे जो स्कूबा डाइविंग के लिए ही बैठे थे।
मेरे समुद्र में उतरने से पहले तीन लोग स्कूबा डाइविंग करके आ चुके थे। उनके समंदर की तलहटी में रंगीन मछलियों और चट्टानों के साथ बेहतरीन फोटो आए थे। समंदर के अंदर वीडियो और फोटोग्राफी टिकट में ही शामिल थी।
मेरा भी नंबर आया तो कमर में लोहे का भारी बेल्ट बांध दिया गया। पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर और नाक को मास्क से पैक कर दिया गया। अब सिर्फ मुंह से सांस लेनी और छोड़नी थी। मुझे तैरना नहीं आता था लेकिन स्कूबा डाइविंग में ये कोई बाधा नहीं थी। 5 मिनट की प्रैक्टिस के बाद पहली बार गहरे समंदर में उतर गया। मैंने स्टीमर के पास ही गोता लगा लिया और पानी के नीचे गोता लगाने लगा।
पहले तो सामने धुंधला पानी दिखा लेकिन जैसे ही तलहटी पर पहुंचा तो दुनिया ही बदल गई। आसपास ढेर सारी रंगीन मछलियां और साफ पानी। ऐसा लगा कि स्वर्ग में आ गए। सामने इंस्ट्रक्टर फोटो खींचने के लिए कैमरा सेट करने लगा। मैं भी एक समुद्री चट्टान पकड़कर इस बेहतरीन पल को एन्जॉय कर रहा था कि अचानक सबकुछ बदलने लगा।
मुझे अचानक लगा कि जैसे ऑक्सीजन खत्म हो गई। सांस लेने में तकलीफ होने लगी। ऊपर से समंदर के पानी का प्रेशर। मुझे लगा कि शायद मुंह से आक्सीजन की नॉब निकल गई है। मैंने उसे बाहर निकालकर फिर से आक्सीजन अंदर खींची तो समंदर का नमकीन पानी फुल प्रेशर से मुंह के अंदर घुस गया और सीधा दिमाग पर अटैक करने लगा। कानों के अंदर ऐसा लगने लगा जैसे वे फट जाएंगे।
फिर नॉब बाहर निकाली और सांस खींची, तब भी वही स्थिति। सिर्फ 5 सेकंड में ऐसा लगा कि कुछ ही सेकंड में मौत होने वाली है। सामने मेरे इंस्ट्रक्टर थे लेकिन उसे कुछ कह नहीं पा रहा था और न ही उस समय वह इशारा याद आ रहा था जो खतरे के समय करने से इंस्ट्रक्टर मुझे बचा सकता था। दिमाग धीरे-धीरे शून्य होने लगा।
ऐसे में मेरी विल पॉवर (Will Power) काम में आई। मैंने तुरंत फैसला लिया कि अभी मुझे ही कुछ करना पड़ेगा लेकिन क्या, ये समझने में मैंने ज्यादा देर नहीं की। मुझे ये भी नहीं पता था कि मैं समंदर में कितनी गहराई पर हूं, लेकिन फैसला किया तलहटी में मरने से अच्छा है कुछ प्रयास करके मरना... और मैंने सीधा ऊपर की तरफ उठना शुरू कर दिया। 10 सेकंड में तेजी से ऊपर चढ़ते हुए सतह की तरफ बढ़ने लगा और जब ऊपर आया तो पेट के अंदर खारा पानी भर चुका था।
इंस्ट्रक्टर ने ऊपर पूछा कि क्या हुआ था। फोटो नहीं खिंच पाए हैं फिर से नीचे जाना पड़ेगा लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं बची थी। जल्दी से बोट पर आया और पेट से पानी निकाला। करीब आधा घंटे बाद दिमाग कुछ सोचने-समझने लायक हो पाया। खारे पानी ने सबसे पहले दिमाग पर ही अटैक किया था जिससे आपके निर्णय की क्षमता खत्म हो जाती है। समंदर में फोटो न खिंचने का मलाल रहा लेकिन ये भी सत्य था कि इसी समंदर में मेरी कब्र भी बन सकती थी। खैर कोई बात नहीं, उसके बाद आगे की यात्रा पर चल दिए...
(Mobile No.-9827319747...Mail ID-ss.goyal78@gmail.com...Facebook Page-Shyam Sundar Goyal...Twitter-@ssgoyalat...Instagram-shyam_s_goyal )
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| प्रतीकात्मक फोटो |
आग का दरिया है और तैर कर पार करना है...
कुछ इसी तरह के अनुभव भारत यात्रा (Journey of India) में हुए हैं। आज मैं आपको बताने जा रहा हूं 28 मार्च 2017 की उस घटना के बारे में जब मैं साउथ इंडिया (Journey of South India) की 7214 किमी की यात्रा पर था।गोवा (Journey of Goa) से लौटते हुए समुद्री किले सिंधुदुर्ग को देखने की इच्छा हुई। सिंधुदुर्ग किला (Sindhudurg Fort) महाराष्ट्र के मालवण तट पर है। मालवण से वहां जाने लिए स्टीमर चलते हैं।
मैं मालवण गया तो था किला देखने लेकिन वहां जब देखा कि 800 रुपए में स्कूबा डाइविंग हो रही है तो मैंने पहले स्कूबा डाइविंग (5 best places to go scuba diving in India) की सोची, उसके बाद किला घूमने की। अपनी बाइक (Bike Trip) वहीं किनारे खड़े की और काउंटर पर जाकर 800 रुपए की रसीद कटाई। उस स्टीमर पर और भी लोग सवार थे जो स्कूबा डाइविंग के लिए ही बैठे थे।
मेरे समुद्र में उतरने से पहले तीन लोग स्कूबा डाइविंग करके आ चुके थे। उनके समंदर की तलहटी में रंगीन मछलियों और चट्टानों के साथ बेहतरीन फोटो आए थे। समंदर के अंदर वीडियो और फोटोग्राफी टिकट में ही शामिल थी।
मेरा भी नंबर आया तो कमर में लोहे का भारी बेल्ट बांध दिया गया। पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर और नाक को मास्क से पैक कर दिया गया। अब सिर्फ मुंह से सांस लेनी और छोड़नी थी। मुझे तैरना नहीं आता था लेकिन स्कूबा डाइविंग में ये कोई बाधा नहीं थी। 5 मिनट की प्रैक्टिस के बाद पहली बार गहरे समंदर में उतर गया। मैंने स्टीमर के पास ही गोता लगा लिया और पानी के नीचे गोता लगाने लगा।
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| \महाराष्ट्र के मालवण में सिंधुदुर्ग समुद्री किले के पास स्कूबा डाइविंग Scuba diving. |
मुझे अचानक लगा कि जैसे ऑक्सीजन खत्म हो गई। सांस लेने में तकलीफ होने लगी। ऊपर से समंदर के पानी का प्रेशर। मुझे लगा कि शायद मुंह से आक्सीजन की नॉब निकल गई है। मैंने उसे बाहर निकालकर फिर से आक्सीजन अंदर खींची तो समंदर का नमकीन पानी फुल प्रेशर से मुंह के अंदर घुस गया और सीधा दिमाग पर अटैक करने लगा। कानों के अंदर ऐसा लगने लगा जैसे वे फट जाएंगे।
फिर नॉब बाहर निकाली और सांस खींची, तब भी वही स्थिति। सिर्फ 5 सेकंड में ऐसा लगा कि कुछ ही सेकंड में मौत होने वाली है। सामने मेरे इंस्ट्रक्टर थे लेकिन उसे कुछ कह नहीं पा रहा था और न ही उस समय वह इशारा याद आ रहा था जो खतरे के समय करने से इंस्ट्रक्टर मुझे बचा सकता था। दिमाग धीरे-धीरे शून्य होने लगा।
ऐसे में मेरी विल पॉवर (Will Power) काम में आई। मैंने तुरंत फैसला लिया कि अभी मुझे ही कुछ करना पड़ेगा लेकिन क्या, ये समझने में मैंने ज्यादा देर नहीं की। मुझे ये भी नहीं पता था कि मैं समंदर में कितनी गहराई पर हूं, लेकिन फैसला किया तलहटी में मरने से अच्छा है कुछ प्रयास करके मरना... और मैंने सीधा ऊपर की तरफ उठना शुरू कर दिया। 10 सेकंड में तेजी से ऊपर चढ़ते हुए सतह की तरफ बढ़ने लगा और जब ऊपर आया तो पेट के अंदर खारा पानी भर चुका था।
इंस्ट्रक्टर ने ऊपर पूछा कि क्या हुआ था। फोटो नहीं खिंच पाए हैं फिर से नीचे जाना पड़ेगा लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं बची थी। जल्दी से बोट पर आया और पेट से पानी निकाला। करीब आधा घंटे बाद दिमाग कुछ सोचने-समझने लायक हो पाया। खारे पानी ने सबसे पहले दिमाग पर ही अटैक किया था जिससे आपके निर्णय की क्षमता खत्म हो जाती है। समंदर में फोटो न खिंचने का मलाल रहा लेकिन ये भी सत्य था कि इसी समंदर में मेरी कब्र भी बन सकती थी। खैर कोई बात नहीं, उसके बाद आगे की यात्रा पर चल दिए...
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ReplyDeleteपढ़ते पढ़ते हमारी भी सांसे रुक सी गई थी। बहुत ही रोमांचक वर्णन और उस पल को याद करके आपको आज भी कुछ अजीब सा अलग सा महसूस होता होगा।
ReplyDeleteबेहद ही खतरनाक और सांसे रोकने वाला वर्णन. यानि डाइविंग करवाने वाले ऑक्सीजन लेवल चेक नहीं कर रहे थे. इस तरह तो किसी की भी जान चली जाएगी.
ReplyDeleteGreat post! you explore this topic in a very effective way.
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